करोड़ों के ज़ेवर देव स्थान विभाग की तिजोरियां में बंद हैं, या ग़ायब है।
कब श्रृदालूओ की श्रृद्धा जगेगी:
झालरापाटन ऐतिहासिक भगवान श्री द्वारकाधीश जी के मंदिर में अगस्त 1964 से लेकर आज तक भगवान श्री द्वारकाधीश जी उनके हजारों श्रद्धालुओं से आस लगाए बैठे हैं की है मेरे भक्तों कम से कम मेरा श्रृंगार जो देव स्थान की तिजोरियां में बंद हैं उसे सुशोभित कर मेरी आभा में चार चांद तो लगा दो।

हां सौ फिसदी प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर भगवान श्री द्वारकाधीश जी के ज़ेवर मोती जवाहरात जिनकी किमत करोड़ों रुपए से कम नहीं है वो किमती जेवरात आभुषण भगवान श्री को करीब बासठ साल से भगवान ने धारण नहीं किये है। सवाल पूछा जाय तो कहा जाता है देवस्थान विभाग में डबल लाक में बंद हैं। क्यों बंद है इसका जवाब किसी के पास नहीं है। वापस लाने की किसी ने ज़रुरत महसूस नहीं क्यों नहीं की अब यह सवाल उठने भी लगा है कि क्या जेवरात श्रृंगार सामग्री के रुप में जो है भी या ग़ायब है। क्या श्रृद्धालुओं के मन में भगवान के प्रति यह भाव जागृत नहीं होते हैं कि श्रृंगार वापसी में मन्दिर में आना चाहिए नहीं तो कहां गया यह सवाल नहीं उठाना चाहिए। हम लगातार सामग्री की एक एक वस्तु की लिस्ट जो प्रमाणित है उसे समाचार के माध्यम से श्रृद्धालुओं के समक्ष पेश कर रहे हैं करते रहेंगे।
जब तक समस्त भक्त एकत्रित होकर देश स्थान विभाग से ज़ेवर लाने के एकजूट नहीं हो जाते ।
भगवान की श्रृंगार सामग्री में यह और ज़ेवर है।
- (1)तिलक एक सोने का जिसमें माणक जड़ा हुआ है व छः मोती बाजरा के बराबर के लगे हुए हैं,
- (2)वेणु एक सोने की सब्ज जड़ाऊ मीना की जिसमें माणक की 31 चूंनियां मूंग की दाल के बराबर
- (3) जिसमें 64 खानेभरे हुए हैं 11 खाने खाली है
- (4) एक घड़ी सोने की, मुकुट एक सोने का
- (5)कृण्डल जोड़ एक चांदी का मीना जड़ा हुआ
- (6)कर्णफूल दो नग एक जोड़ी सोने का संत फूलिया ठप्पा का सादा,
- (7)शीस फूल एक सोना का
- (8)सरपेच एक सोने का मय फिलगी व ठेगडा सहित चार तोले सोने का
- (9)हार जिसमें 16 ठेगडा मोटे, सोने का हार मय घुगघुगी एक तथा अठ्ठाईस दाने सोने के जिसका वजन भी चार तौला है
- (10) कठला सोने का जिसमें चौखुटा ताबिज दोनों तरफ सोने का एक ताबिज में पांच माणक जड़ें हुए हैं शेर का नाखुन लगा हुआ है जिसका वज़न दो तोला सोने का है
- (11) चम्पा कली सोने जिसमें दोनों तरफ दस नग जड़ें हुएं हैं बीच में एक पान बड़ा जिसमें सोने के 24 घुघरा है जिसका वज़न एक तौला सोना है
- (12)एक सोने की माला जिसमें दस सोने के दाने के बीच में एक पान सोने का एक तरफ की माला टुटी हुई है
- (13)खरबूजे के बीच के बराबर दस सोने के दाने की है जिसमें एक दाना टूटा हुआ है, एक पान सोने का
- (14)छुनदघटिका एक सोने की जिसमें पन्द्रह घूघरा व दो दाना व लटकन में एक दाणा का
- (15) हसली एक सोने की कडा चार नग सोने के
- (16)एक वेत्रयानी छड़ी सोने की
- (17)शंख एक जिसके मुंह पर सोने की परत चढ़ी हुई है
- (18) पिचकारी सोने की जिसमें डांड चांदी की है
- (19)सेजाजी की भापिया चार तौलें सोने की जिसमें आठ भापिया व चार हरड़ है एक भापी टूटी हुई है
- (20)पाटूका जी की चौकी झापिया चार हरड़ व सोने की झापी जड़ी हुई है जिसका वज़न छः तौला एक रति है। जिसकी क़िमत उस समय 486 रुपये 67 पैसे किमत आंकी गई तब सोने का भाव अस्सी रुपए तौला था
- (21) तकिया की झाफिया 12 साढ़े चार तौले सोने की
- (22) चोबिस तौले की बृज भत्तिया याने पुतलियां सोने की दो जिनके चोकी चांदी की टूटी हुई है जिसमें 24 तौला सोना नौ सौ ग्राम चांदी है। शेष अगले अंक में समाचार प्रकाशित कर अवगत करवाएंगे। पुरानी लिखावट होने से हो सकता है शब्दों को समझने में गलती हो लेकिन वज़न श्रृंगार सामग्री समझी जा सकती है। देखना यह इस पुनीत कार्य में किन किन श्रृद्धालुओं को भगवान श्री द्वारकाधीश माध्यम बनाते हैं।










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