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Amarinder Singh Raja Warring: पंजाब की राजनीति का ‘फायरब्रांड’ नेता

On: February 15, 2026 3:28 AM
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पंजाब की राजनीति में जब भी किसी ऐसे नेता का ज़िक्र होता है जिसने शून्य से शुरुआत की और अपनी मेहनत के दम पर सत्ता के गलियारों तक पहुँचा, तो Amarinder Singh Raja Warring का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वे सिर्फ एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि पंजाब कांग्रेस के उस जुझारू चेहरे के रूप में उभरे हैं, जो मुश्किल वक्त में भी अपनी पार्टी के लिए दीवार बनकर खड़ा रहा।

आज के इस लेख में हम राजा वड़िंग के जीवन, उनके राजनीतिक उत्थान, उनके संघर्षों और उनकी कार्यशैली को गहराई से समझेंगे।

Amarinder Singh Raja Warring

शुरुआती जीवन: एक साधारण परिवार से राजनीति का सफर

29 सितंबर 1977 को पंजाब के मुक्तसर जिले के वड़िंग गांव में जन्मे Amarinder Singh Raja Warring के नाम के साथ उनके गांव का नाम ‘वड़िंग’ और उनका उपनाम ‘राजा’ इस तरह जुड़ा कि आज वे इसी पहचान से जाने जाते हैं।

Amarinder Singh Raja Warring का शुरुआती जीवन किसी आम पंजाबी युवक की तरह ही था, लेकिन उनके भीतर नेतृत्व करने की क्षमता बचपन से ही थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मुक्तसर से पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए हाथ-पैर मारे। उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने छात्र राजनीति (Student Politics) में कदम रखा।

राजनीतिक उत्थान: यूथ कांग्रेस से मुख्यधारा तक

Amarinder Singh Raja Warring की राजनीति किसी ‘विरासत’ की मोहताज नहीं थी। उन्होंने कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI से अपने सफर की शुरुआत की। उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें पंजाब यूथ कांग्रेस की कमान सौंपी गई।

भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष (2014-2018)

Amarinder Singh Raja Warring मेहनत और गांधी परिवार (विशेषकर राहुल गांधी) के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें राष्ट्रीय फलक पर ला खड़ा किया। 2014 में, उन्हें भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह एक बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि पंजाब के एक युवा नेता का दिल्ली की राजनीति में इतना प्रभावशाली पद संभालना उनकी काबिलियत का प्रमाण था।

गिद्दड़बाहा से जीत की हैट्रिक

Amarinder Singh Raja Warring का असली चुनावी इम्तिहान 2012 के पंजाब विधानसभा चुनावों में हुआ। उन्होंने गिद्दड़बाहा (Gidderbaha) सीट से चुनाव लड़ा, जो कभी शिअद (SAD) का गढ़ मानी जाती थी। उन्होंने मनप्रीत सिंह बादल को हराकर सबको चौंका दिया। इसके बाद 2017 और फिर 2022 में भी उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा, जिससे यह साबित हो गया कि वे केवल ‘हवा’ में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी जगह बना चुके हैं।

परिवहन मंत्री के रूप में ‘सख्त’ छवि

कैप्टन Amarinder Singh Raja Warring के इस्तीफे के बाद जब चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बने, तो राजा वड़िंग को पंजाब का परिवहन मंत्री (Transport Minister) बनाया गया। भले ही उनका कार्यकाल छोटा था, लेकिन उन्होंने अपनी कार्यशैली से खूब सुर्खियां बटोरीं।

  • निजी बसों पर नकेल: उन्होंने अवैध रूप से चल रही निजी बसों (विशेषकर बादल परिवार से जुड़ी बसों) पर कड़ी कार्रवाई की।
  • राजस्व में वृद्धि: उनके कार्यकाल के दौरान पंजाब रोडवेज़ और पीआरटीसी के राजस्व (Revenue) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। उन्होंने खुद बस अड्डों का औचक निरीक्षण किया, जिससे विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों में एक सक्रियता देखने को मिली।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष: कांटों भरा ताज

2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी को एक ऐसे नेता की ज़रूरत थी जो बिखरी हुई कांग्रेस को फिर से एकजुट कर सके। आलाकमान ने राजा वड़िंग पर भरोसा जताया और उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का अध्यक्ष नियुक्त किया।

यह पद उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि:

  1. पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर थी।
  2. आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रचंड लहर का सामना करना था।
  3. सिद्धू मूसेवाला जैसे करीबियों की हत्या और पार्टी कैडर का गिरता मनोबल एक बड़ी चिंता थी।

Amarinder Singh Raja Warring ने अध्यक्ष बनते ही ‘गांव-गांव, घर-घर’ अभियान शुरू किया और ज़मीनी कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ना शुरू किया। उनकी बातचीत का अंदाज़ा बहुत ही देसी और पंजाबी लहजे वाला है, जो लोगों को तुरंत कनेक्ट करता है।

व्यक्तिगत जीवन और परिवार

Amarinder Singh Raja Warring का विवाह अमृता वड़िंग से हुआ है, जो खुद एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं और अक्सर उनके चुनावी अभियानों में कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। उनके दो बच्चे हैं। राजा वड़िंग अक्सर सोशल मीडिया पर अपने परिवार के साथ तस्वीरें साझा करते हैं, जो एक राजनेता की व्यस्त जीवनशैली के बीच उनके मानवीय पक्ष को दर्शाता है।

विवादों से नाता

राजनीति है तो विवाद भी होंगे। Amarinder Singh Raja Warring का नाम कई बार तीखी बयानबाजी और विरोधियों के साथ झड़पों में आया। परिवहन मंत्री रहते हुए उन पर ‘बदलाखोरी’ की राजनीति करने के आरोप लगे, जिन्हें उन्होंने हमेशा नकारा और इसे ‘कानून का पालन’ बताया। हाल के वर्षों में विजिलेंस जांच और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर भी वे चर्चा में रहे, लेकिन वे हमेशा इन आरोपों को ‘राजनीतिक साजिश’ करार देते आए हैं।

निष्कर्ष: पंजाब की सियासत का भविष्य?

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग आज पंजाब में कांग्रेस के सबसे सक्रिय चेहरों में से एक हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी ऊर्जा (Energy) और कनेक्टिविटी है। वे उन चंद नेताओं में से हैं जो आधी रात को भी अपने कार्यकर्ता के घर पहुँच सकते हैं।

2026 और आने वाले चुनावों में राजा वड़िंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। क्या वे कांग्रेस को पंजाब में फिर से नंबर एक बना पाएंगे? यह तो समय बताएगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि वड़िंग ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मज़बूत हों, तो एक साधारण गांव का लड़का भी राज्य की राजनीति का सिरमौर बन सकता है।

एक्सपर्ट इनसाइट: राजा वड़िंग की सफलता का राज उनकी ‘accessibility’ (उपलब्धता) है। वे एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं जो सोशल मीडिया पर जितने एक्टिव हैं, उतने ही जमीन पर भी। युवा वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता कांग्रेस के लिए एक बड़ा एसेट (Asset) है।

VIJAY SAMDARSHI

हैलो दोस्तों मेरा नाम विजय समदर्शी है मैं करीब पांच वर्षो से पत्रकारिता कर रहा हूँ. और इस वेबसाइट पोर्टल पर मैं आपको सटीक खबरें देने व दैनिक जीवन में काम आने वाली खबरों को प्रकाशित करता हूँ,जो आपके काम आ सके l

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