NEET UG 2026: अब डॉक्टर बनना हुआ आसान? देश भर के लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स (aspirants) के लिए इस साल की सबसे बड़ी खुशखबरी आ चुकी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने न केवल NEET UG 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है, बल्कि मेडिकल शिक्षा के इतिहास में सीटों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक को भी हरी झंडी मिल गई है।खबर यह है कि इस साल MBBS की लगभग 15,000 सीटें बढ़ाई गई हैं। अगर आप डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं, तो यह साल आपके लिए ‘गोल्डन ईयर’ साबित हो सकता है। आइए, इस पूरी खबर को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि इसका आपकी तैयारी और सिलेक्शन पर क्या असर पड़ेगा।
NEET UG 2026: अब डॉक्टर बनना हुआ आसान?: महत्वपूर्ण तारीखें
आवेदन शुरू: 8 फरवरी 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 8 मार्च 2026 (रात 9:00 बजे तक) आप आवेदन कर सकते हैं.
सबसे पहले, उन जरूरी तारीखों पर नज़र डालते हैं जिन्हें आपको अपने कैलेंडर में मार्क कर लेना चाहिए। NTA ने आधिकारिक तौर पर 8 फरवरी 2026 से आवेदन विंडो खोल दी है।
परीक्षा की तारीख: 3 मई 2026 (रविवार) इसकी परीक्षा होना संभावित है.आधिकारिक वेबसाइट: neet.nta.nic.in पर जाकर आप और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
प्रो-टिप: आखिरी तारीख का इंतज़ार न करें। अक्सर आखिरी दिनों में सर्वर पर लोड बढ़ जाता है, जिससे तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
15 हजार सीटों का ‘गणित’: सीटें कहाँ और कैसे बढ़ीं?
यह केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि 15 हजार नए मौके हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देश में मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या में भारी उछाल आया है।
- कुल मेडिकल कॉलेज: अब संख्या बढ़कर 824 हो गई है (जो पहले 775 थी)।
- कुल MBBS सीटें: अब देश में कुल सीटें 1,29,603 के पार पहुंच गई हैं।
- बढ़ोतरी: पिछले साल (2025) की तुलना में यह करीब 15 हजार सीटों का इजाफा है.
सरकारी बनाम प्राइवेट सबसे
अच्छी बात यह है कि यह बढ़ोतरी केवल प्राइवेट कॉलेजों में नहीं हुई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों (GMCs) में भी सीटों की संख्या 63,000 के पार जा चुकी है। इसका सीधा मतलब है कि कम फीस में एमबीबीएस करने के अवसर भी बढ़े हैं। नए खुले कॉलेजों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य शामिल हैं, जहां कट-ऑफ आमतौर पर बहुत हाई रहती है।
छात्रों के लिए इसका क्या मतलब है? (Implications & Analysis)
एक एस्पिरेंट के तौर पर आप सोच रहे होंगे, “क्या इससे मुझे सीट मिलेगी?” चलिए इसे एक एक्सपर्ट की नज़र से देखते हैं:
A. कट-ऑफ पर असर (Cut-off Analysis)साधारण अर्थशास्त्र का नियम है—जब सप्लाई (सीटें) बढ़ती है, तो डिमांड का प्रेशर थोड़ा कम होता है.
- राहत की सांस: 15,000 सीटें बढ़ने का मतलब है कि कट-ऑफ में थोड़ी गिरावट आ सकती है.जो छात्र पहले 5-10 नंबर से सरकारी सीट से चूक जाते थे, उनके लिए इस बार उम्मीद की किरण ज्यादा है.
- प्रतियोगिता अब भी कड़ी: हालांकि, यह याद रखें कि इस साल करीब 24 लाख से ज्यादा छात्रों के बैठने की उम्मीद है.इसलिए, कॉम्पिटिशन कम नहीं हुआ है, बस ‘सक्सेस रेट’ थोड़ा बेहतर हुआ है.
B. सीट-टू-स्टूडेंट रेश्यो (Seat-to-Student Ratio)पहले जहां एक सीट के लिए सैकड़ों छात्रों की लड़ाई थी, अब वह अनुपात थोड़ा सुधरेगा। यह उन छात्रों के लिए बहुत बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला फैक्टर है जो अपनी तैयारी को लेकर तनाव में थे।
आवेदन करते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
NTA ने इस बार कुछ नियमों को सख्त किया है। फॉर्म भरते समय ये गलतियां करने से बचें:
लाइव फोटो: इस बार फॉर्म भरते समय आपको वेबकैम से लाइव फोटो भी अपलोड करनी पड़ सकती है, इसलिए तैयार रहें।
दस्तावेज़ (Documents): अपना आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र (अगर लागू हो) और 10वीं की मार्कशीट पहले से डिजिटल फॉर्म में तैयार रखें।
करेक्शन विंडो: हालांकि बाद में सुधार का मौका (10-12 मार्च) मिलेगा, लेकिन कोशिश करें कि पहली बार में ही फॉर्म सही भरें। नाम की स्पेलिंग और कैटेगरी में गलती भारी पड़ सकती है।
निष्कर्ष: अब आगे क्या?
यह खबर निश्चित रूप से सकारात्मक है.15 हजार सीटें बढ़ने का मतलब है कि सरकार हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए गंभीर है.लेकिन एक छात्र के रूप में, आपका फोकस इन नंबरों पर नहीं, बल्कि अपनी NCERT की किताबों और मॉक टेस्ट पर होना चाहिए.
मेरी सलाह: इस खबर को एक ‘कॉन्फिडेंस बूस्टर’ की तरह लें, न कि रिलैक्स होने के बहाने के रूप में। सीट बढ़ी हैं, लेकिन वह सीट उसी को मिलेगी जो अगले 3 महीने (मई तक) अपना 100% देगा.ऑल द बेस्ट! फॉर्म आज ही भरें और अपनी पढ़ाई में जुट जाएं.
अस्वीकरण: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और NTA/NMC के नवीनतम अपडेट्स पर आधारित है.आधिकारिक जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट देखें.










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