Jhalarapatan mela :
JHALAWAR: कहीं आपात काल जैसे हालात तो नहीं। कहीं ऐतिहासिक मेला चंद्रभागा राजनीतिक षड्यंत्र का शिकारत नहीं
झालरापाटन अंग्रेजी हुकूमत में भी शायद सांस्कृतिक विरासत, परम्परागत तरीके से लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा मेले पर कभी भी आतंक का साया नहीं पड़ा होगा।
लेकिन पिछले दो सालों से मेले पर चंद चून चोट्टे नेताओं के कारण समय अवधि के पूर्ण होने के पूर्व मेले का अस्तित्व को समाप्त करना निश्चित व्यवस्था पर एक सवाल है।
जनता के बीच यह भी सवाल है क्या कोई ऐसा षड्यंत्र चल रहा है, जिससे जनप्रतिनिधि की छवि खराब कर झालरापाटन विधानसभा चुनाव का परिणाम बदला जा सके ।
कोई माने या नहीं माने सच्चाई और हालात पुर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के विरूद्ध जनता के बीच षड्यंत्रकारी ताकतों का एक माया जाल चल रहा है। राजनीति में जायज़ तो सब है लेकिन सांस्कृतिक विरासत जो हमेशा से परम्परागत तरीके से संचालित होने वाली व्यवस्था पर एक कुठाराघात है।
जिसमें केवल मेले में आने वाले व्यापारियों को ही नहीं बल्कि खरीदी करने आये महिलाओं बच्चों को भी लाठी की ताक़त से मेले परिसर से बाहर निकाला गया। शाय़द देश में यह पहला मामला है जहां से लाखों रुपए की सरकारी आय होने के पश्चात भी दुकानदारों को महंगी दुकानें बेच कर घाटे का व्यापार करने का कू चक्र रचा गया। जबकि हाल ही सुत्रो से प्राप्त से जानकारी प्राप्त हुई है की क्षैत्रिय विधायक वसुंधरा राजे सिंधिया प्रवास के दौरान पांच तथाकथित नेता मेले को बंद करवाने के विषय में बात करने गये थे , लेकिन मैडम ने डांट पिलाते हुए यही कहा था की तुम्हारे कहने से मेले को हमेशा के लिए बन्द कर देते हैं तुम कहोगे जैसा होगा क्या। उसके उपरांत उनके जाने के दो दिन बाद ही आपातकाल जैसे हालात उत्पन्न हो गये।
मकरसंक्रांति के पन्द्रह दिन पहले जबरदस्ती मेले को बन्द करवा दिया। जबकि मेला चलने का मुख्य कारण है सर्दी , जबकि इस साल तेज सर्दी इक्कतीस दिसम्बर को प्रारंभ हुई जरुरत मंद लोगों को गर्म कपड़े की आवश्यकता इसी दौरान मांग होती है।









