FMD कागज़ों में टीके, जमीन पर धोखा, सरकारी पोर्टल से करोड़ों की खानापूर्ति का शक
रामगंजमंडी। राज्य सरकार द्वारा पशुओं को खुरपका–मुंहपका जैसी घातक बीमारी से बचाने के लिए चलाया जा रहा टीकाकरण अभियान अब डिजिटल घोटाले की शक्ल लेता जा रहा है । पशुपालन विभाग की एनिमल टैगिंग व टीकाकरण पोर्टल प्रणाली में जो सामने आया है, वह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़ा प्रतीत होता है । सरकारी रिकॉर्ड खुद यह बता रहे हैं कि पशु नहीं, बल्कि डेटा को टीका लगाया गया.सरकारी एनीमल हिस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार एक ही आईडी से पशु पंजीकरण टैगिंग,सत्यापन,एफएमडी टीकाकरण सब कुछ दिखा दिया गया । क्या एक व्यक्ति अकेले इतने पशुओं की भौतिक टैगिंग और टीकाकरण कर सकता है ? विशेषज्ञों का जवाब है कदापि नहीं । 70 किलोमीटर दूर बैठकर ऑनलाइन टीकाकरण क्या साबित करते है.रिकॉर्ड बताते हैं कि श्रीपुरा (कोटा) क्षेत्र, जो मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है, वहां के पशुओं का टीकाकरण कागजों में कर दिया गया। न कोई दौरा, न कोई वाहन लॉग, न कोई भौतिक सत्यापन,बस पोर्टल खुला और टीकाकरण “पूर्ण”।यह स्थिति बताती है कि पोर्टल को जमीनी हकीकत से काटकर सिर्फ फाइलें भरने का औजार बना दिया गया। एक ही परिवार, कई पशु Owner ID – 110002821815166 अंजना / टी.एस. चौहान कोटा नगर निगम क्षेत्र, लाडपुरा,इसी एक आईडी पर—गाय,भैंस,बकरी,सबका पंजीकरण, टैगिंग और टीकाकरण एक ही लॉगिन से दर्ज है,यह सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि डेटा मैनिपुलेशन का स्पष्ट संकेत है । पोर्टल पर एंट्री हुई 7878435894 से मामला उजागर हुआ तो नंबर बदलकर 9828533743 कर दिया गया. यह नंबर जय सिंह पवार दादाबाड़ी कोटा से जुड़ा है। संदेह इस बात को लेकर भी जताया जा रहा है कि पहले इन प्रविष्टियों को मोबाइल नंबर 7878435894 से दर्ज किया गया, लेकिन मामला उजागर होने के बाद वही एंट्री पोर्टल में संशोधित कर मोबाइल नंबर 9828533743 से जोड़ दी गई। खबर प्रकाशित होने के बाद अंजना, श्रीपुरा कोटा से जुड़े मोबाइल नंबर को बदलकर दूसरे नंबर से पोर्टल में दर्ज किया गया, जो कोटा निवासी जयसिंह पंवार का बताया जा रहा है। अब इसे भी नंबर 9772576042 पर बदल दिया। इससे पहचान छुपाने और रिकॉर्ड में हेरफेर का संदेह और गहरा गया है।
सवाल उठता है सरकारी पोर्टल में मोबाइल नंबर बदलने की अनुमति किसके आदेश से दी गई? क्या यह साधारण सुधार था या जानबूझकर पहचान छुपाने की कोशिश ? डिजिटल रिकॉर्ड बताते हैं कि यह पूर्व नियोजित लीपापोती हो सकती है। एक ही दिन में सैकड़ों टैगिंग रिकॉर्ड बोले, सिस्टम फेल रिकॉर्ड के अनुसार 24 फरवरी 2024,28 मार्च 2024 को एक ही दिन में बड़ी संख्या में पशुओं की टैगिंग और एंट्री की गई।पशुपालन विशेषज्ञ कहते हैं“इतने कम समय में भौतिक टैगिंग संभव नहीं। यह सीधा-सीधा फर्जीवाड़ा है।”टीकाकरण तारीखें भी संदेह के घेरे में एफएमडी टीकाकरण की तारीखें 29 मई 2025,29 अक्टूबर 2025 दर्ज हैं, लेकिन न तोफील्ड रिपोर्ट न कोल्ड चेन रिकॉर्ड न टीम मूवमेंट कुछ भी मेल नहीं खाता।यानी टीका कागज़ों में, भुगतान सिस्टम में और पशु भगवान भरोसे!सबसे बड़ा सवाल : संरक्षण किसका?जब लॉगिन आईडी सामने है,मोबाइल नंबर बदलने का रिकॉर्ड मौजूद है, दूरी और समय फर्जीवाड़ा साबित कर रहे हैं,तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या यह पूरा खेल वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी में या उनकी जानकारी में चल रहा है? नहीं तो घोटाला दबा दिया जाएगा।
पशुपालकों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि संबंधित लॉगिन आईडी की आईटी व फोरेंसिक ऑडिट दोनों मोबाइल नंबरों से हुई सभी एंट्री की जांच, श्रीपुरा (कोटा) क्षेत्र में भौतिक सत्यापन, दोषियों पर एफआईआर और निलंबन, पूरे जिले के टीकाकरण डेटा की री-वेरीफिकेशन,यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला केवल पशुपालन विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल बन जावेगा।।










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