भारतीय डोमेस्टिक क्रिकेट का एक चमकता सितारा और रणजी का नया ‘हीरो’
भारतीय क्रिकेट हमेशा से ही टैलेंट की खदान रहा है, जहाँ हर रोज़ डोमेस्टिक क्रिकेट (घरेलू क्रिकेट) से नए सितारे उभर कर आते हैं। ऐसे ही एक होनहार और प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं— शुभम सिंह पुंडीर। हाल ही में रणजी ट्रॉफी 2025-26 के फाइनल में अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद शुभम रातों-रात क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। आइए आज हम इनके जीवन की कहानी Shubham Pundir Biography को जानते आसान शब्दों में।
इस आर्टिकल में हम शुभम पुंडीर की ज़िंदगी, उनके क्रिकेट के सफर, उनके खेलने के तरीके और हाल ही में बनाए गए उनके उस रिकॉर्ड के बारे में गहराई से जानेंगे, जिसने उन्हें एक आम खिलाड़ी से ‘रणजी हीरो’ बना दिया है।
शुरुआती जीवन और क्रिकेट की शुरुआत
शुभम सिंह पुंडीर का जन्म 16 अक्टूबर 1998 को उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों वाले शहर, देहरादून में हुआ था। बचपन से ही शुभम का झुकाव क्रिकेट की तरफ था। एक ऐसे माहौल में बड़े होते हुए जहाँ क्रिकेट की गहरी जिज्ञासा थी, उन्होंने बहुत कम उम्र में ही इस खेल में अपनी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी थी।
शुरुआती दिनों में शुभम भारतीय क्रिकेट दिग्गजों को अपना आदर्श मानते थे और घंटों उनके मैच देखा करते थे। उनके परिवार ने भी बहुत जल्दी उनके इस टैलेंट को पहचान लिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पूरा सपोर्ट किया। शुभम ने अपने सफर की शुरुआत लोकल क्लब और स्कूलों से की। यहीं से उन्होंने एक बेहतरीन मिडिल-ऑर्डर (मध्य क्रम) बल्लेबाज और एक लेग-ब्रेक गुगली गेंदबाज के रूप में अपने स्किल्स को निखारा। ओर धीरे – धीरे खेल प्रेमियों की निगाह में आने लगे।
प्रोफेशनल क्रिकेट में कदम और डेब्यू
जैसे-जैसे शुभम बड़े हुए, उनका खेल भी निखरता गया। अंडर-19 लेवल पर स्टेट टीम में चुने जाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2016-17 के सीज़न में डोमेस्टिक सर्किट में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें सिलेक्टर्स की नज़रों में ला खड़ा किया।
अगर हम उनके बड़े डेब्यू (Debut) की बात करें, तो उनके करियर की टाइमलाइन कुछ इस तरह रही है:
- फर्स्ट-क्लास (First-Class) डेब्यू: 13 जनवरी 2015 को जम्मू-कश्मीर ( Jammu and Kashmir) की तरफ से 2014-15 रणजी ट्रॉफी में खेले
- टी20 (T20) डेब्यू: फिर 26 मार्च 2015 को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेले
- लिस्ट-ए (List A) डेब्यू: इसके बाद 8 फरवरी 2018 को विजय हजारे ट्रॉफी में।
भले ही उनका जन्म देहरादून में हुआ, लेकिन डोमेस्टिक क्रिकेट में शुभम जम्मू और कश्मीर (J&K) की टीम का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुके हैं।
खेलने का स्टाइल और करियर स्टैटिस्टिक्स
शुभम पुंडीर मुख्य रूप से एक बाएं हाथ के बल्लेबाज (Left-handed batter) हैं जो अपनी शानदार तकनीक, संयम और धैर्य के लिए जाने जाते हैं। मिडिल-ऑर्डर में खेलते हुए पारी को संभालना और ज़रूरत पड़ने पर तेज़ी से रन बनाना उनकी सबसे बड़ी खासियत है। इसके साथ ही, वह एक उपयोगी लेग-ब्रेक गुगली (Legbreak googly) स्पिनर भी हैं, जो उन्हें एक अच्छा ऑलराउंडर विकल्प बनाता है।
फरवरी 2026 तक उनके शानदार करियर के आंकड़े (Stats) एक नज़र में डालते हैं।
- फर्स्ट-क्लास क्रिकेट: 31 मैचों की 50 पारियों में उन्होंने 27.57 की औसत से 1296 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 3 शानदार शतक और 3 अर्धशतक निकल चुके हैं।
- लिस्ट-ए क्रिकेट: 41 मैचों की 40 पारियों में उन्होंने 27.97 की औसत और 75.14 के स्ट्राइक रेट से 1007 रन बनाए हैं, जिसमें नाबाद 96 रन उनका हाईएस्ट स्कोर रहा है।
- टी20 क्रिकेट: 42 टी20 मुकाबलों में उन्होंने 111.7 के स्ट्राइक रेट से 695 रन बटोरे हैं।
वही अपने पूरे क्रिकेट करियर (सभी फॉर्मेट) में उन्होंने 124 विकेट भी झटके हैं।
रणजी ट्रॉफी 2025-26 फाइनल: जब शुभम ने रचा इतिहास
क्रिकेट में कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं। शुभम पुंडीर के करियर का वह सुनहरा दिन 24 फरवरी 2026 को आया।
हुबली (Hubli) में खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी 2025-26 के फाइनल मैच में जम्मू-कश्मीर का सामना 8 बार की चैंपियन टीम कर्नाटक से था। जम्मू-कश्मीर की टीम पहली बार रणजी फाइनल में पहुंची थी। टॉस जीतकर कप्तान पारस डोगरा ने पहले बैटिंग चुनी, लेकिन 18 रन पर ही टीम का पहला विकेट गिर गया। कप्तान पारस भी चोटिल होकर (रिटायर्ड हर्ट) वापस लौट गए। उस मुश्किल समय में 27 साल के शुभम पुंडीर तीसरे नंबर पर बैटिंग करने उतरे।
वीरेंद्र सहवाग वाले अंदाज़ में पूरा किया शतक
शुभम ने दबाव वाले माहौल में शानदार तकनीक और धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने साथी खिलाड़ी यावर हसन (88 रन) के साथ 139 रनों की बेहद अहम साझेदारी की। इस पारी का सबसे रोमांचक पल तब आया जब शुभम 94 रन पर खेल रहे थे। आमतौर पर फाइनल जैसे दबाव वाले मैच में खिलाड़ी सिंगल-डबल लेकर अपना शतक पूरा करते हैं, लेकिन शुभम ने 186वीं गेंद पर कर्नाटक के स्पिनर शिखर शेट्टी के खिलाफ आगे बढ़कर मिड विकेट के ऊपर से एक लंबा छक्का जड़ा और अपना ऐतिहासिक शतक पूरा किया! यह बिल्कुल पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग के अंदाज़ जैसा था।
इस शतक के साथ ही शुभम पुंडीर जम्मू-कश्मीर की तरफ से रणजी फाइनल में शतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी (शतकवीर) बन गए। पहले दिन का खेल खत्म होने तक वह 221 गेंदों में 12 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 117 रन बनाकर नाबाद लौटे और अपनी टीम को एक बेहद मजबूत स्थिति (284/2) में पहुंचा दिया।
निष्कर्ष
शुभम सिंह पुंडीर का सफर एक बात साफ़ करता है—अगर आपमें टैलेंट है, और आप धैर्य के साथ अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं, तो बड़े मंच पर आप ज़रूर चमकेंगे। एक छोटे से शहर से निकलकर जम्मू-कश्मीर जैसी टीम के लिए रणजी फाइनल में संकटमोचक बनने तक का उनका यह सफर कई युवा क्रिकेटरों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
जिस तरह की परिपक्वता (Maturity) और निडरता उन्होंने कर्नाटक के इंटरनेशनल अनुभव वाले गेंदबाज़ों (जैसे प्रसिद्ध कृष्णा) के सामने दिखाई है, उससे यह साफ़ है कि भारतीय क्रिकेट में शुभम पुंडीर का भविष्य बेहद उज्जवल है। आने वाले समय में फैंस को उनके बल्ले से ऐसे ही कई और शानदार रिकॉर्ड्स देखने की उम्मीद है।









